बॉलीवुड एक्टर संजय मिश्रा वो हैं जिन्होंने धीरे-धीरे बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई. आज संजय मिश्रा के बर्थडे पर बता रहे हैं उस स्टार की कहानी जो छोटे-छोटे रोल करता ही रहा, मगर जब अवसर मिला तो अपनी एक्टिंग से दिखा दिया की उनमें कितना दम है. संजय मिश्रा का जन्म 6 अक्टूबर, 1963 को बिहार के दरभंगा में हुआ था. इनके पिता शम्भुनाथ मिश्रा जो कि एक पत्रकार है। इन्होंने अपनी शिक्षा वाराणसी से केंद्रीय विद्यालय बीएचयू कैम्पस से की। इसके बाद इन्होंने बैचलर की डिग्री पूरी करने के बाद राष्ट्रीय ड्रामा स्कूल में प्रवेश किया और सन 1989 में स्नातक हो गए। संजय मिश्रा ने अपने पहला अभिनय जो कि एक टेलीविज़न धारावाहिक में (चाणक्य (धारावाहिक) में किया था, इससे पहले इन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ भी कार्य करने का मौका मिला। उनकी ऐसी पांच फिल्मों के बारे में जिनमें उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया और इन फिल्मों को भी खूब पसंद किया गया.

आंखों देखी-(2014) ये फिल्म उनके करियर की अब तक की सबसे शानदार फिल्मों में से एक मानी जाती है. इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे शख्स का रोल प्ले किया था जो अपनी जॉब से तंग आकर रिटायरमेंट लेने का फैसला करता है और जीवन का सार जानने की कोशिश करता है. इस दौरान कुछ लोग उसे पागल कहने लग जाते हैं तो कुछ लोग उसे आध्यात्मिक कहते हैं. वो जीवन को लेकर अपनी अलग ही फिलॉस्पी बनाता है और उसमें जीना पसंद करता है.

अंग्रेजी में कहते हैं-(2018) इस फिल्म में संजय मिश्रा ने उम्र के इस मोड़ पर भी रोमांटिक रोल को चुना. फिल्म में पति-पत्नी की ऐसी बॉन्डिंग के बारे में दिखाया गया था जो आमतौर पर हर घर में पाई जाती है. मगर आज तक इसके मायने समझ पाने में पति कामियाब हो पाता है या फिर पत्नी. फिल्म में इन्हीं कुछ गलतफहमियों को उजागर किया गया है, साथ में ये भी बताया गया है कि कैसे एक हसबेंड-वाइफ के बीच की परस्पर समझ, एक मजबूत रिश्ते की नींव रखती है.

कड़वी हवा-(2017) फिल्म के माध्यम से ये बताने की कोशिश की गई थी कि अगर हम अभी भी नहीं सचेते, तो फिर ये पर्यावरण जिसमें हम खुल कर जी रहे हैं, हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाएगा. रियल इंसिडेंट और गांव में पड़े सूखे पर बनी इस फिल्म में संजय मिश्रा बेहद संवेदनशील रोल में नजर आए थे.

सारे जहां से महंगा-(2013) ये एक पॉलिटिकल सटायर फिल्म थी. फिल्म के माध्यम से ये दिखाने की कोशिश की गई थी कि महंगाई की मार एक मिडिल क्लास फैमिली में किस तरह से पड़ती है. फिल्म को काफी पसंद किया गया था. मगर कई सारे लोगों का ऐसा मानना था कि अच्छे आइडिया को एडॉप्ट करने के बावजूद फिल्म और बेहतर तरीके से पेश की जा सकती थी. चाहें जो भी ऐसी फिल्मों की छोटी-छोटी खामियों को बेखूबी ढकने के लिए संजय मिश्रा की परफॉर्मेंस से ज्यादा और क्या हो सकता है. उन्होंने उम्मीद अनुसार ऐसा किया भी.

मसान-(2015) यूं तो मसान फिल्म में उनका रोल लीड नहीं था मगर इसके बावजूद भी फिल्म में उनकी एक्टिंग की तारीफ की गई थी. उन्होंने फिल्म में रिचा चड्ढा के पिता का रोल प्ले किया था जो अपनी बेटी से परेशान भी है और उसे प्यार भी बहुत करता है.