नई दिल्ली: महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के एनडीएमसी सभागार में विश्व हिंदी परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंर्तराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का शनिवार को समापन हो गया।

केन्द्रीय राज्य मंत्री जनरल सिंह, एनडीएमसी की सचिव रश्मि सिंह एवं विश्व हिंदी परिषद के महासचिव डॉ. बिपिन कुमार ने दुनिया भर से आए 50 जाने-माने शिक्षा विदों, साहित्याकारों और समाजसेवियों को सम्मानित किया। श्री सिंह ने कहा कि, हिंदी बेहद ही सरल और सहज भाषा है, जिसमें अंग्रेजी भाषा की तरह कोई भी वर्ण बड़ा या छोटा नहीं होता है। उनका कहना था कि, हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है, क्योंकि ये भारत के जन, मन और गण की भाषा है। उन्होंने विश्व हिंदी परिषद को बधाई देते हुए कहा कि, देश को ऐसे श्रेष्ठ हिंदी सेवी और समाज सेवी संस्थानों की आवश्यकता है। उन्होंने भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय से आग्रह किया कि, विदेश के विश्वविद्यालयों में ज्यादा से ज्यादा सीटें स्थापित करें, ताकि हिंदी की दुनिया भर में शान बढ़े।

शुक्रवार को इस दो दिवसीय अंर्तराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन गोवा की राज्यपाल और प्रसिद्ध साहित्यका मृदुला सिन्हा ने किया था। शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार की अध्यक्षता में उदघाटनकर्ता मृदुला सिन्हा, मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी, एनडीएमसी सचिव रश्मि सिंह और विश्व हिंदी परिषद के सचिव डॉ. विपिन कुमार के द्वारा दीप जलाकर और राष्ट्रगान गाकर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की थी।

इस अवसर पर गायिका मैथिली ठाकुर ने वैष्णव जन तो तेने कहिए जी…भजन और लोक गीत के माध्यम से लोगों का मन मोह लिया था। इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार का कहना था कि, हिंदी के साथ बापू के सपनों को साकार किया जा सकता है। शनिवार को जानी-मानी एवं सम्मानित हस्तियों की मौजूदगी में बेहद ही शानदार तरीके से इस दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन हो गया।