पटना : लोगों की वास्तविक पहचान उनकी बोली, भाषा, विरासत और लोक संस्कृति से होती है। बिहार में भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, बज्जिका और मगही सहित अनेक बोलियां बोली जाती हैं और उन सबकी अपनी एक विरासत है जो लोकगीतों में झलकती है। लोक गायिका कल्पना ने ब्लीस टॉक द्वारा लीड्स एशियन स्कूल में आयोजित टॉक शो में लोक विरासत और सांस्कृतिक पहचान के संबंध में बोलते हुए कहा कि गंगा नदी, गांव की माटी और छठ-तीज जैसे त्यौहार हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं । बिहार के लोकगीतों  और बिहार की संस्कृति से जोड़कर  उन्होंने बहुत कुछ पाया है और अब उनकी कोशिश है कि इस संस्कृति से जुड़ी अच्छी बातों का प्रचार-प्रसार पूरी दुनिया में करें । इस अवसर पर लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि लोकगीत मां की लोरी के समान होते हैं जहां हमें सुकून मिलता है । गलाकाट प्रतिस्पर्धा और अनियमित जीवनशैली के कारण जीवन में तनाव बढ़ रहा है ।

अपनी विरासत और संस्कृति से जुड़े रहकर ही हम जीवन को खुशहाल बना सकते हैं । कल्पना और नीतू नवगीत ने कार्यशाला के दौरान  लोकगीतों की विभिन्न शैलियों  कजरी, झूमर,  निर्गुण, चैता, कीर्तन, भजन आदि की जानकारी देते हुए हर विधा के गीतों की झलकियां भी पेश की।कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों को प्रेरित करते हुए भारतीय रेल यातायात सेवा के अधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि असफलताओं से कभी भी घबराना नहीं चाहिए । जो कोशिश करते हैं, वही गिरते हैं, वही चोट खाते हैं, लेकिन अंत में सफलता के शिखर को भी वही चूमते हैं । चुनौतियों का सामना करके ही जीत हासिल की जा सकती है। निदेशक डॉ विजय कुमार साहू ने कहा कि टॉक शो के माध्यम से हमें उन हस्तियों से संवाद करने का मौका मिलता है जिन्होंने जीवन में एक मुकाम पाया है। यह कार्यक्रम छात्रों के मनोरंजन और ज्ञानवर्द्वन के लिए बेहतरीन मंच प्रदान करता है। लीड्स एशियन स्कूल के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ने कहा कि छात्र छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक जीवन से जुड़ी बातों की जानकारी भी रखनी चाहिए ताकि वे तनाव पर नियंत्रण रखते हुए खुशहाल जीवन जी सकें। इस अवसर पर वरिष्ठ लोक गायक भरत सिंह भारती, लीड्स एशियन स्कूल की सचिव पुष्पा सिन्हा, प्रिंसिपल अनीता सिंह, बांसुरी वादक विष्णु बहादुर थापा, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे ।